'रङ्गभेद से मुक्ति दिलाना है’

पिताम्वर राउत, राजविराज, सप्तरी
यही अवसर है एक होनेका विगत वर्षौ से हम मधेशवासी आन्दोलनरत है । कितने शहीद हुए कितने घायल अपाङ्ग और कितने नारी भी विधवा हुई । पर आन्दोलन से हमे क्या मिला हमारा लक्ष्य हमे मीस गया क्या ? हम जनतामे क्या कहकर गए थे ? उस वादेको नही मूल्य है । आन्दोलन के दौरान बलिदानी देनेवाले वीरौंको हमे सम्मान देना है । वीरोका आत्मा अन्तरिक्ष मे भटक रहा है और मधेशी वीर से कह रहा है वीराें हिम्मत मत हारों आगे बढो तुम्हे अपना लक्ष्य भी अवश्य मिलेगा और हमारा कर्तव्य है कि उन बलिदानी वीरों के भटकते हुए आत्मा को चिर शान्ति के लिए आजाद मधेश के जलसे सौ बार श्रद्धाञ्जली दे ताकी अ आत्मा को शान्ति मिले ।

इसलिए अब हमे अपने वास्तविक लक्ष्य के और निरन्तर बढना चाहिए, नकि किसी मूल भूलैया मे नही रहता है । अभितक का उपलब्धि यह संविधान है जो पुरा नही हुआ है वह भी अधुरा है । इस संविधान मे भी फर्क ही पडनेबाला है । क्यो कि संविधान में लिखने से भी हमे उपलब्धि नही है । जो देख रहे है, संविधान क्या कहता है और ये शोषक शासक वर्ग क्या करता है । इसका एक माग विकल्प है आजादी तभी हम अपना अधिकार पा सकते है । हमे संयमित होकर एकताबद्ध होना है और आगेका लडाई लडना है और माँ मधेशको दासता और रंगभेद से मुक्ति देना है । जिससे हमारे भावी सन्तान को यह दूख नही झेलना पडे । वह एक स्वतंत्र मधेश का नागरिक बने और अपना अधिकार लेकर माँ मधेश का कल्याण करे । हमे यह नही भुलना चाहिए कि दासता के मिठाई से आजादी का घास मीठा होता है ।
अतः इस षडयन्त्रकारी शोषक सरकार से हमे मधेशवासी को एक होकर परास्त करना है । और माँ मधेश को दासता और रंगभेद से मुक्ति दिलाना है । यही अवसर है जिसमे हम एक होकर लडे और माँ मधेश को मुक्ति दिलावे आप अपने सन्तान के भविष्य को उज्ज्वल करें ।

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