सप्तरी : बाढी पीडित क्षेत्र अबलोकन गर्दै डा सि के राउत

एम के मैथिल राजबिराज | स्वतन्त्र मधेश गठबन्धन के संयोजक डा सि के राउत लगाइत स्वराजीहरुको टिम आज सप्तरी जिल्लाको बाढी प्रभावित विभिन्न क्षेत्रमा अबलोकन गर्दै मधेशी जन्तालाइ भेटघाट गरिएको छ।

कोशी बाइरेज,कनकालनी मंदिर भारदह, सप्तरीको टिकुलीया, रमपुरा,मलहिनिया, कुनौली लगायतका एक दर्जन गाउँ भन्दा बढिमा बाढीबाट प्रभावित पीड़ित संग डा. सि के राउत और स्वराजीद्वारा अबलोकन गर्दै भनेको कुराहरु डा राउतले लेखे अनुसार तल दिएको छ :

अगर आज मधेश की अपनी सेना होती, तो डुबते हुए मधेशियों को हेलिकोप्टर से भी उद्धार किया होता !

अगर आज मधेश की अपनी सरकार होती, तो मधेश में कब  उद्धार टोली रबाना हो गई रहती !

अगर आज मधेश स्वतन्त्र देश होता, तो बाढ को ऐसा बिकराल रुप धारण करने की नौबत नहीं आती !

अगर आज मदेश स्वतन्त्र देश होता, तो विदेशी सहयोग भी घंटे भर में  उद्धार और राहत के लिए आते ! (याद है न पहाड में महाभूकम्प के बाद किस तरह तुरन्त विदेशी हेलिकप्टर आ गए थे उद्धार करने, तो मधेश के लिए क्यों नहीं ? मधेश की बाढ के विषय में तो लगता है विश्व को कोई जानकारी ही नहीं ! )


अविरल वर्षा प्राकृतिक है, पर मधेश की बाढ राजनैतिक। फिरंगी नेपाल सरकार द्वारा जान-बुझकर मधेश को बाढ की चपेट में डालने की परिस्थिति बनाई जाती है, ताकि सभी मधेशी मधेश से बह जाए, विस्थापित हो जाए, और पूरे के पूरे मधेश फिरंगियों के कब्जे में आ जाए ! 


नहीं तो क्या बाढ पिछले साल नहीं आई थी ? तो नेपाल सरकार ने बाढ़ को रोकने के लिए कहाँ पर क्या किए, कितने तटबन्ध निर्माण किए, पानी निकास के कितने भौतिक और राजनैतिक रुकावट को हटाए ? 


मधेशियों को "काबू": में रखने के लिए हरेक गांव-गांव में सशस्त्र पुलिस और जगह-जगह पर सेना कैम्प विछाने वाले नेपाल सरकार, मधेशियों को गोली ठोकने के लिए हर वक्त तैनात "वीर गोरखाली सेना और पुलिस", लोकतान्त्रिक निर्वाचन कराने के लिए गांव-गांव में टैंकर लेकर फिरने वाली फिरंगी नेपाली सेना, मधेशियों को उद्धार की जरूरत पडने पर कहाँ गायब हो जाती है ? 

तस्वीर :

बाढ़ प्रभावित क्षेत्र सप्तरी के भारदह, कोशी बैरेज, हनुमाननगर, रमपुरा, मल्हनिया आदि भ्रमण, ३१ श्रावण २०७४ मंगलवार ।

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